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आशीष शर्मा बाल भिक्षावृत्ति दूर करने के लिए कर रहे हैं लोगों को जागरूक। || Samachar India

मन मे उमंग और दिल मे देश से बाल भिक्षा वृत्ति खत्म करने का जज्बा । इसी उद्देश्य के साथ 35 साल के इंजीनियर आशीष शर्मा ने इंजिनयरिंग छोड़ देश के लोगों को जाग्रत करने का उठाया है बीड़ा । 6 लाख का पैकेज छोड़ कर दिल्ली निवासी आशीष शर्मा कर रहे है पैदल मार्च और बाल भिक्षावृत्ति दूर करने को लेकर लोगों को जागरूक ।
कभी पथरीले रास्ते कभी पहाड़ की ऊंची चढ़ाई तो कभी समुद्र का किनारा । इन्हीं रास्तों के सहारे आशीष हाथ मे तिरंगा लिए आगे बढ़ रहे है । अगस्त 2017 को आशीष कहीं जा रहे थे ताभि एक बच्चा उनके पास आया और भीख माँगने लगा । इस घटना से आशीष इतने द्रवित हुए की उन्होंने इंजियनरिंग छोड़ दी और 22 अगस्त 2017 को निकल पड़े देश के लोगों में अलख जगाने के लिए । 17 हजार किलोमीटर की पैदल यात्रा पर निकले आशीष ने अब तक 6101 किलोमीटर की पैदल यात्रा पूरी कर ली है । इस दौरान वह लोगों से मिलते है उनको बताते है कि बाल भिक्षा वृत्ति देश के लिए कितना बड़ा अभिशाप है । जिन बच्चों के हाथ मे किताब होनी चाहिए , खिलौने होने चाइये उनके हाथ दूसरों के आगे कुछ मांगने के लिए बढ़ते है तो लगता है जैशे कोई उनका बचपन छीन रहा है ।
दिल्ली के युवा इंजीनियर आशीष शर्मा समाज से बाल भिक्षा वृत्ति दूर करने को निकले है। उनका बाल भिक्षावृत्ति रोकने का ये अभियान अनूठा है। वो देश के लोगों को जागरूक करने के लिए 17 हजार किलोमीटर की पदयात्रा पर निकले है। आशीष इन दिनों बृज चौरासी कोस परिक्रमा में लोगों को जागरूक कर रहे हैं। मैकेनिकल इंजीनियर आशीष ने अपने इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए जॉब छोड़ दी है। 22 अगस्‍त 2017 से इस लक्ष्य के लिए पदयात्रा कर रहे हैं। अशीष अब तक 6101 किलोमीटर से ज्‍यादा पदयात्रा कर चुके हैं। दुआएं फाउंडेशन के तहत 17 हजार किलोमीटर की पदयात्रा को आशीष ने उन्मुक्त भारत का नाम दिया है। इस अभियान के तहत देश के 29 राज्‍य एवं 7 केंद्र शासित प्रदेशों के 4900 गांवों में बाल भिक्षावृत्ति को रोकने के लिए लोगों को जागरूक किया।
आशीष का  कहना है कि वह लोगों को यह बताना चाहते हैं कि भीख मांगते बच्‍चों को गाली न दें और शोषण करने के बजाय उन्‍हें समाज की मुख्‍यधारा में शामिल करने में मदद करें।
एक हाथ में तिरंगा एवं कंधे पर टंगे बैग को लेकर पदयात्रा कर रहे आशीष शर्मा के चेहरे पर कोई शिकन नहीं है। हाथ में जीपीएस घड़ी दूरी माप रही है दिल्ली के समसपुर निवासी सुरेश शर्मा के पुत्र इंजीनियर आशीष शर्मा ने एयर क्राफ्ट से मेंटीनेंस व मैकेनिकल इंजीनियरिंग कर एक कंपनी में छह लाख रुपये के पैकेज की नौकरी ज्वाइन की थी। जब वह दो वर्ष पहले जॉब के लिए घर से निकले तो रास्ते में एक बच्चे को भीख मांगते देखा तो उसकी मासूमियत पर तरस आ गया और उन्होंने बच्चे को ले जाकर स्कूल में दाखिला कराया। इसके बाद उनकी जिंदगी बदल गई और उन्होंने बाल भिक्षावृत्ति रोकने के लिए एक अभियान छेड़ दिया। जिसमें हरियाणा, गुजरात, दमन, गोवा, सिलवासा, मध्यप्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड होते हुए उत्तर प्रदेश के सहारनपुर, देवबंद, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, बदायूं, अलीगढ़ आदि जनपदों में होते हुए मथुरा पहुंचे है। उनका मानना है कि बाल भिक्षा वृत्ति रुकी तो इससे 68 प्रतिशत तक अपराध स्वंय खत्म हो जाएगा समाज में परिवर्तन नजर आएगा।
आशीष का मानना है कि इस अभियान के तहत वह शिक्षक-शिक्षिकाओं को भी जागरूक कर रहे हैं। जिससे बाल भिक्षुओं को समाज में शामिल कर उनका भविष्य संवारने के अभियान में सहयोग मिल रहा है। लोग मानने लगे हैं कि बालकों के भीख मांगने से बेहतर उन्हें स्कूल भेजने से फायदा होगा। जिसकी वजह से अब वह 14 जून को उन्मुक्त दिवस मनाने की तैयारी कर रहे हैं। इंजीनियर आशीष शर्मा ने बताया कि वह अपने दोस्तों के साथ मिलकर एक मोबाइल एप्लीकेशन डवलप कर रहे हैं। जिसकी मदद से हर पांच किलोमीटर के दायरे में किसी बालभिक्षु के होने पर उसकी जानकारी अपलोड की जा सकेगी। जिससे आसपास के पुलिस अधिकारी एवं अनाथ आश्रम उस बच्चे की मदद को पहुंच जाएंगे।

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