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जानिए अष्ट सिद्धि नव निधि के बारे में

अष्ट सिद्धि नव निधि की बात आते ही भगवान हनुमान जी का नाम सबसे पहले याद आता है, जिनका नाम लेने से उनकी कृपा हो जाने से इन्सान अष्ट सिद्धि नव निधि पा जाता है, लेकिन आखिर ये होती क्या है, इस बारे में बहुत कम ही लोग जानते है, आज हम आपको इन्ही के बारे में बताएंगे की आखिर अष्ट सिद्धि नव निधि होती क्या है. इन अष्ट सिद्धियों को प्राप्त करना इतना आसान नहीं होता है, इनको प्राप्त करने के लिए मनुष्य को सदाचार युक्त और वैराग्य युक्त जीवन व्यतीत करना पडता है, और खुद को विषय भोगो से दूर रखकर बहुत ही नियमित जीवन जीना पड़ता है,

अष्ट सिद्धियां

1.अणिमा सिद्धि
2. महिमा सिद्धि
3. गरिमा सिद्धि
4. लघिमा सिद्धि
5. प्राप्ति सिद्धि
6. प्राकाम्य सिद्धि
7. ईशित्व सिद्धि
8. वशित्व सिद्धि

भगवान हनुमान जी इन सभी सिद्धियों के दाता है, (अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता । अस बर दीन्ह जानकी माता ।।) उनकी पूजा करने से भगवान हनुमान जी की कृपा से इन सिद्धियों की प्राप्ति होती है

1.अणिमा सिद्धि से अपने स्वरूप को अति सूक्ष्म किया जा सकता है ।
2. महिमा सिद्धि से अपने रूप को अति विशाल किया जा सकता है।
3. गरिमा सिद्धि के प्रयोग से अपना भार इच्छानुसार बढ़ाया जा सकता है।
4. लघिमा सिद्धि से व्यक्ति का भार बिल्कुल हल्का हो जाता हैं और आकाश में गमन कर सकता है ।
5. प्राप्ति सिद्धि से किसी भी वस्तु को प्राप्त किया जा सकता है, और पशु पक्षियों की भाषा का ज्ञान होता है.भविष्य जाना जा सकता है
6. प्राकाम्य सिद्धि से पृथ्वी की गहराइ पाताल तथा आकाश में जाया जा सकता हैं और पानी में भी जीवित रह सकते हैं। और अपनी इच्छा अनुशार
रूप धारण किया जा सकता है , तथा किसी के भी शरीर में अपनी आत्मा को प्रविष्ट किया जा सकता है.

7. ईशित्व सिद्धि की प्राप्ति से दैवीय शक्ति की प्राप्ति होती है। तथा मरे हुए को जिन्दा किया जा सकता है।
8. वशित्व सिद्धि की प्राप्ति से दुसरो को अपने काबू में करने की क्षमता प्राप्त होती है।

नौ निधियां

नौ निधियों का संबंध धन-सम्पति से होता है। इनको प्राप्त करके मनुष्य अपार धन सम्पति का मालिक बन जाता है,

1. पद्म निधि
2. महापद्म निधि
3. नील निधि
4. मुकुंद निधि
5. नंद निधि
6. मकर निधि
7. कच्छप निधि
8. शंख निधि
9. खर्व निधि।
1. पद्म निधि से संपन्न मनुष्य सात्विक गुणयुक्त होता है, और उसकी दवारा कमाया गया धन भी सात्विक होता है। यह सात्विक निधि है, और इसका पप्रभाव साधक के परिवार में पीढ़ी-दर-पीढ़ी बना रहता है।
2. महापद्म निधि से युक्त व्यक्ति भी सात्विक होता है। इसका प्रभाव 7 पीढ़ियों तक रहता है, इस निधि से युक्त आदमी दानी होता है।
3. नील निधि में सत्व और रज दोनों गुण होते हैं। इससे संपन्न व्यक्ति में सत्व और रज दोनों गुणों की ही प्रधानता होती है। ये व्यक्ति लोकहित के काम करता है, इस निधि का प्रभाव 3 पीढ़ियों तक रहता है।
4. मुकुंद निधि में रजोगुण की प्रधानता रहने के कारन यह राजसी स्वभाव वाली निधि है । इससे संपन्न व्यक्ति का मन भोगादि में अधिक रहता है। यह निधि एक पीढ़ी के बाद नष्ट हो जाती है।
5. नंद निधि रजोगुण और तमोगुण का मिश्रण है, यह निधि साधक को लंबी आयु और लगातार तरक्की प्रदान करती है, वह व्यक्ति कुटुम्ब का मुखिया होता है।
6. मकर निधि तामसी निधि है, इससे युक्त व्यक्ति अस्त्र शस्त्र का संग्रह करता है, और उसका राजा और शासन में दखल रहता है, शत्रुओं पर विजय प्राप्त करता है, और लड़ाई के लिए तैयार रहता है, उसकी मौत भी इसी कारण होती है।
7. कच्छप निधि का मालिक व्यक्ति तामसी गुणों से युक्त होता है ,और अपनी सम्पति का न तो स्वयं उपयोग करता है, न किसी को करने देता है।
8. शंख निधि वाला सारे धन का उपयोग खुद ही करता है, इसके पास प्रचुर धन होने के बाबजूद इसके परिवार वाले गरीबी में जीते हैं। यह एक ही पीढ़ी के लिए होती है.
9. खर्व निधि को मिश्रत निधि भी कहा जाता हैं,यह सभी 8 निधियों का मिश्रण होती है । ऐसे व्यक्ति का जीवन उतार-चढ़ावभरा होता है, इस निधि वाला व्यक्ति विकलांग और घमंडी होता हैं.

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पंडित देशराज शर्मा

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