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शिददत के साथ रोजेदारों ने अता की मुकद्दस रमजान के आखिरी जुमे की नमाज

बबलू सैनी
रुड़की/समाचार इंडिया

मुकद्दस रमजान के आखिरी जुमा (अलविदा जुमा) की नमाज नगर व आसपास के देहात इलाकों में बड़ी अकीदत के साथ अदा की गई। जुमे की नमाज के बाद नमाजियों ने खुदा से गुनाहों की माफी मांगी और रहमतों वाले इस महीने में देश में अमनों-अमान, सुख समृद्धि, प्रदेश की तरक्की और खुशहाली तथा कौम की उन्नति की विशेष दुआऐं भी मांगी गई।
नगर की प्रमुख जामा मस्जिद के अलावा सिविल लाइन मस्जिद,आईआईटी स्थित मस्जिद, अनस मस्जिद, सफ़रमैना मस्जिद, मस्जिद बिलाल मरकज वाली मस्जिद,पठानपुरा मस्जिद, मोती मस्जिद,कानूनगोयान वाली मस्जिद,मस्जिद लोहारान, साबिरी मस्जिद, मोती मस्जिद, शेख बेंचा मस्जिद, आयशा मस्जिद, नूर मस्जिद, मस्जिद हुसैनिया, उमर बिनखत्ताब मस्जिद, मस्जिद-ए- हव्वा, मस्जिद अबूबकर, मक्का मस्जिद, नमरा मस्जिद, ईदगाह कब्रस्तान वाली मस्जिद, मदरसा मखदूम बख्श वाली मस्जिद, झोजों वाली मस्जिद, सिद्दीकिया मस्जिद,मस्जिद रशीदिया, मदीना मस्जिद,बंधारोड वाली मस्जिद, मस्जिद मुस्तफा, रहीमिया मस्जिद,गफूरिया मस्जिद के अलावा आजाद नगर, शेखपुरी, कचहरी, गुलाब नगर, मदरसा मिस्बाह उल उलूम, मदरसा इरफान-उल-उलूम स्थित मस्जिदों में बड़ी संख्या में रोजेदारों ने अलविदा जुमा की नमाज अदा की। जामा मस्जिद में अलविदा जुमे की नमाज से पहले अपने खिताब में मौलाना अजहर उल हक ने कहा की अगर एक इंसान दूसरे इंसान का हक अदा कर दे तो किसी तरह का झगड़ा नहीं होगा। उन्होंने कहा कि अल्लाह के रसूल ने एक दूसरे का हक अदा करने की सख्त हिदायत दी है। हर मुसलमान को जकात, फितरा, सदका अदा कर समाज के गरीब लोगों की मदद करनी चाहिए। उन्होंने बताया कि इस बार फितरा अदायगी ₹35 है तथा जकात ढाई फीसद बैठती है, जिसे रमजान में अदा करना हर मुसलमान का हक है। जामा मस्जिद में जुमे की नमाज कारी कलीमुद्दीन ने अदा कराई।कारी शमीम अहमद ने कहा कि अल्लाह की मेहरबानी से माहे रमजान का कारवां 25 में रोजा तक पहुंच गया है। यह दोजख से निजात पाने का असरा चल रहा है। इस अशरे में रोजा-नमाज के साथ-साथ नवाफिल पढ़ने और कुरान पाक का तिलावत करने का बड़ा महत्व है तथा ऐतकाफ मैं बैठने का भी बड़ा सवाब है। मौलाना नसीम अहमद कासमी ने कहा कि रोजे का मकसद सिर्फ भूखा रहना ही नहीं बल्कि तक्वा जिंदगी गुजारना है। अल्लाह की तमाम कायनात से उनके अहकाम को मद्देनजर रखते हुए अल्लाह की मर्जी के मुताबिक काम करें।अल्लाह ने इंसान को पैदा करने के साथ-साथ कुछ ऐसे चीजें भी पैदा की है, जिनके जरिए उसे मजकूरा बातों का इल्म हासिल रहता है। इंसान के हवास यानी आंख-कान और हाथ-पांव को दूसरे अक्ल के जरिए अता किया जाता है। कुरान करीम इस जहां में वह नियमत है जिसका बदला नहीं दिया जा सकता। इंसान को चाहिए कि खुशदिलों से कुरान को खुद भी पढ़ें और अपने बच्चों को भी पढ़ाऐं और उसके मुआयने और अहकाम को समझें और उस पर अमल करें। मुफ्ती मोहम्मद सलीम, मौलाना अरशद कासमी, कारी जावेद आलम, कारी नफीस अहमद ने भी जुमा रमजान वह शबे कद्र की महत्ता पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर हाजी फुरकान अहमद विधायक, अफजल मंगलौरी,डॉ. नैयर काजमी, राव शेर मोहम्मद,हाजी नौशाद अली, हाजी सलीम खान, डॉ. इरशाद मसूद, जावेद अख्तर एडवोकेट, शेख अहमद जमां, कुंवर जावेद इकबाल, मोहम्मद शाहिद,आरिफ नियाजी, मुनव्वर हुसैन,अख्तर मलिक, अहमद भारती, एम. हसीन,अरशद साबरी, जाकिर त्यागी, फखरे आलम खान, मदरसा प्रशासक हाजी शहजाद अंसारी, शहर काजी आमिर अहमद, इमरान देशभक्त, मोहम्मद जुल्फान, अलीम सिद्दीकी, सैयद नफीस उल हसन, डा. मोहम्मद मतीन, सलमान फरीदी,शाकिर अली, नसीम मलिक,डॉ. असलम कासमी, हाजी महबूब कुरैशी, रियाज कुरैशी, डा. फुरकान अहमद, मेहरबान अली, डॉ. मोहम्मद मोहसिन, इरशाद मोरवीन, जावेद फैंसी, जहांगीर अहमद आदि मौजूद रहे।

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